भोजपुरी मात्र भाषा ही ना ह बल्कि
एक समाज ह। एकर आपन गौरवशाली इतिहास ह, एकर आपन साहित्य, संस्कृति
आ संस्कार ह। एह देश में बहुमत में बोलल जायेवाला भाषा ह। लेकिन
सरकार के दोयम निति के कारण आज भोजपुरी भाषा के अपेक्षा काफी कम
संख्या में बोलल जायेवाला भाषा के भारतीय संविधान के आठवीं अनुसूची
में दर्जा देहल जा चुकल बा लेकिन भोजपुरी भाषा के बारे में सरकार
आज भी मूक-बधिर के भुमिका अपनावे से गुरेज नईखे करत।
देश के सरकार जहां आपन कुटिल निति के सहारे भोजपुरी के प्रति सौतेला
व्यवहार अपना रहल बा वहीं भोजपुरी क्षेत्र से जुड़ल सांसद लोग के
द्वारा भोजपुरी भाषा के संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल करावे
के नगण्य प्रयास करल जा रहल बा। दुखद स्थिति त ई बन चुकल बा कि अइसन
सांसद लोग के द्वारा मात्र आश्वासन के अलावा अउर कवनो सफलतम प्रयास
आज तक नईखे करल जात। परिणाम ई भईल कि आज भी भोजपुरी कराह रहल बिया
आ एकरा भाषा के रूप में अपनावे वाला लोग के गरीमा आ महत्वकांक्षा
के उळपर प्रश्नचिन्ह लाग रहल बा।
आखिर का कर रहल बाड़े भोजपुरी क्षेत्र से जुड़ल सांसद ? ई प्रश्न एक
यक्ष प्रश्न नईखे जेकर जवाब धर्मराज युधिष्ठिर ही दे सकेलन। इ त
एक अईसन प्रश्न ह जेकर जवाब हरेक भोजपुरीया जान रहल बा। हरेक भोजपुरीया
इ समझ रहल बा कि भोजपुरी क्षेत्र से जुड़ल सांसद लोग के द्वारा एह
विषय में कवनो ध्यान ही नईखे देल जात।
अगर भोजपुरी क्षेत्र से जुड़ल सांसद भोजपुरी के गरीमा, मान्यता, महत्व,
अधिकार आ विकास के बारे में गंभीर नईखन त फिर कवना बात के वोट उनका
के दिहल जाव ? एकदम सटिक प्रश्न बा आ आठवीं अनुसूची में भोजपुरी
भाषा के शामिल करावे खातिर एकदम सही प्रहार आ विचार बा। अगर भोजपुरी
क्षेत्र से जुड़ल सांसद ही आपन क्षेत्र के बारे में ना सोची त फिर
कवना बात के सांसदी करे के हकदार रही ? कवना अधिकार आ कर्तव्य के
आधार पर भोजपुरीया लोग से वोट पावे के अधिकारी रही ?
प्रजातंत्र के मतलब होला कि प्रजा के वोट पर, प्रजा के माध्यम से
चुनल प्रतिनिधि के माध्यम से, प्रजा के हित में निर्णय लेवे वाला
तंत्र। एह तंत्र के अनुसार यानि विधानपालिका के अनुसार संसदीय क्षेत्र
अउर विधानसभा क्षेत्र निर्धारित बा। एकर मतलब आ आशय एकदम साफ बा
कि जनता के प्रतिनिधि आपन संसदीय आ विधानसभा क्षेत्र से जुड़ल समस्या
आ विकास के संदर्भ में संसद आ विधानसभा में आवाज उठावो। अगर देखल
जाव त भोजपुरी क्षेत्र से चुनाव के माध्यम से जीतल सांसद के संख्या
एह देश के संसद में बहुतायत में बा। लेकिन फिर भी उनका लोग के द्वारा
भोजपुरी के मान्यता, महत्ता, अधिकार आ विकास के बारे में चुप्पी
साधे के सिवा कवनो पुरजोर कोशिश एकजुट होकर के ना करल गईल। भोजपुरी
क्षेत्र खातिर 2जी स्पेक्ट्रम मामला आ काॅमनवेल्थ गेम में भईल घोटाला
से ओतना लेना-देना नईखे जेतना भोजपुरी भाषा के मान्यता से जुड़ल समस्या
बा। कुछ भोजपुरीया सांसद के द्वारा देश में हो रहल घोटाला के बारे
में त आवाज उठावल जाला लेकिन भोजपुरी मान्यता के बारे में आवाज बुलंद
नईखे करल जात। अगर देखल जाव त एह देश के संसद में भोजपुरी क्षेत्र
से चुनाव जीत के आईल सांसद लोग आपन क्षेत्र के विकट समस्या के बारे
में ना त गंभीर बा आ ना ही जागरूक बा।
एही से अब हरेक भोजपुरीया के ई कठोर निर्णय लेवे के जरूरत बा कि
अगर एह देश के संसद में भोजपुरीया सांसद आवाज नईखन उठावत त उनका
के वोट देकर के संसद में मत भेजल जाव। जवन भोजपुरीया सांसद भोजपुरी
के प्रति गंभीर नईखे ओकरा के मुंहतोड़ जवाब दिहल जरूरी बा आ एकरा
खातिर हरेक भोजपुरीया के एकजुट होखल भी जरूरी बा।
अभी से ही एह बात के तईयारी करते हुए आगाज कर दिहल जाव कि ‘‘भोजपुरी
आठवीं अनुसूची में शामिल ना त भोजपुरीया सांसद के वोट ना’’। ई नारा
जब बुलंद होई त एह आगाज के दुंदुभी भोजपुरीया सांसद लोग के कान में
भी जरूर जाई। एह बात पर सोचे खातिर मजबुर कर दिही कि अबकी धाकी एह
देश के कोना-कोना में बसे वाला भोजपुरीया बात के भरम मे ना पड़ी।
साथ ही साथ हम कहब कि मात्र चुनाव जीतल भोजपुरी सांसद के परिपेक्ष्य
में ही खाली एह नारा के लागू मत करल जाव बल्कि जेतना भी नेता भोजपुरी
क्षेत्र से जुड़ल बा, ओकरा प्रति भी एह नारा के बुलंद करल जाव। काहे
कि अगर चुनाव जीतल भोजपुरीया सांसद एह विषय में गंभीर नईखे त चुनाव
हारल भोजपुरी सांसद प्रत्याशी भी ओतने जिम्मेवार बा। भोजपुरीया भाषा
के मान्यता आंदोलन के एक दशा आ दिशा निर्धारण खातिर सांसद आ सांसद
प्रत्याशी अगर ना सोची त ओकरा अबकी धाकी चुनाव में मुंह के खाये
के पड़ी। सांसद संसद में चुप बा आ सांसद प्रत्याशी मात्र विवशता के
घड़ियाली आंसु बहा के अगिला चुनाव में जीतावे के अनुरोध में लागल
बा। चाहे सांसद होखो भा सांसद प्रत्याशी होखो, दुनो के दुनो वर्ग
निजी महत्वकांक्षा आ निजी स्वार्थ के पुरा करे में लागल बा आ भोजपुरीया
लोग के भरमावे में व्यस्त बा। एह लोग के ई बात के स्पष्ट संदेश दिहल
जाव कि अगर चुनाव में जीते के इच्छा बा त भोजपुरी के भारतीय संविधान
के आठवीं अनुसूची में शामिल करे के पुरजोर प्रयास जारी कर देस। सांसद
देश के संसद में आवाज बुलंद करो आ सांसद प्रत्याशी आपन आवाज के भोजपुरी
क्षेत्र में बुलंद करो आ आंदोलन के माध्यम से भोजपुरी के दिशा आ
दशा के बेहतर स्वरूप प्रदान करे के प्रयास करो।
भोजपुरी के आठवीं अनुसूची में शामिल करावे के एह मुहिम के जेतना
व्यापक रूप दिहल जाई, जेतना लोग के जोड़ल जाई, जेतना ज्यादा लोग के
जागरूक करल जाई, ओतने एकर परिणाम सफलता के मूर्त रूप बन जाई। आवश्यकता
बा सभे भोजपुरीया के एकजुट होकर के एक ही नारा बुलंद करे केरु ‘‘अगर
भोजपुरी आठवीं अनुसूची में शामिल ना त वोट ना’’।
ई अभियान महत्वपूर्ण बा लेकिन जटिल नईखे। एकर परिणाम महत्वपूर्ण
बा लेकिन एकजुटता के बाद एकर अंजाम सहज बा। एह बात के ध्यान में
रखते हुए हरेक भोजपुरीया एकजुट होखो आ एह बात खातिर दृढ़ संकल्प हो
जाओ कि आपन माटी से जुड़ल भाषा के एह देश में मान्यता दिलावे के अथक
प्रयास रही आ हरेक भोजपुरीया एह महायज्ञ में आहुत हो जाई। एक शायर
के कहल बा रु ‘‘कौन कहता है कि
आसमां में हो नही सकता है सुराख
एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों।’’
आर0 के0 पाण्डेय ‘‘राज’’
लखनउळ
मो. नं0 : +91-7830008787
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पूर्वांचल
एक्स्रेस एक मुहीम शुरू कर रहा है की भोजपुरी आठवी अनुसूची में नहीं
तो वोट नहीं. सभी भोजपुरिया भाई बहन से निवेंदन है की आप भी इस मुहीम
का हिस्सा बने और आपना विचार इस भेजे हमे भेजे, आपके विचार पुर्वंचालेक्स्प्रेस.कॉम
पर प्रकाशित किया जायेगा आपके फोटो और नाम के साथ :
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