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आजु जे तरह से महुआ टीवी
आपन रंग फइला रहल बा अपना सीरियल अउरी प्रोग्राम
से, एह समय महुआ चइनल के सीरियल अउरी हिन्दी सीरियलन
से प्रतियोगिता में बुझाता नंबर एक हो जाई। काल्हु
ले हमरा घरे,आस पडोस अउरी दोस्त-यारन किहाँ के लोग
हिन्दी सीरियल - मै बनुगी तेरी दुल्हन, मायका, कसौटी
जिन्दगी के, कस्तुरी, कसम से, सात फेरे, अउरी बिग
बॉस देखत रहे से छोड़ के महुआ टीवी के सीरियल देख
रहल बा लोग। आजु लोग खाली महुआ टीवी अउर प्रकाश
झा के बारे में बतिया रहल बा। लोग के महुआ टीवी
पर प्रकाश झा के बनावल सीरियल बाहुबली सोहाता, लोग
के मुताबिक आजु के तारीख में कउनो अइसन पावरफुल
सीरियल कउनो भाषा में आ कउनो अउरी चइनल पर नइखे
लउकत। ई सीरियल देखला के बाद त हमरा फिल्म शूल,
गंगा जल अउरी अपरहरण याद आ रहल बा। एह में सभ लोगवे
आपन काम बहुते जबरस्त तरीका से कइले बा।
अपराध
के छांह में पनपल राजनीति के सच्चाई बखानत "बाहुबली"

उत्तर भारत के समाजिक, आरथिक
आ राजनीतिक हालात के चलते बेरा कुबेरा कैगो बाहुबलिअन
के जनम भइल....आ एह बाहुबलिअन के पइसा, पावर अउर
सत्ता के खेल में हरमेस आम अदमी के मोहरा बनाके
पेस कइल जात रहे....हर बेर टूटल-छिटाइल सपनओ आम
अदमी के एगो नवका विचार देत रहे....जेकरा दम पर
ऊ साँच आ विस्वास के लड़ाई लड़त अउर जीतत रहे....बाहुबली
ओही जीत के कहानी ह....
महुआ चइनल पर चल रहल एह सीरियल के निरमान हिन्दी
सिनेमा के नामी आ प्रतिबद्ध निरमाता प्रकाश झा आ
चर्चित यूवा निर्देसक अंशुमान किशोर सिंह निर्देसित
कइले बाड़न। सीरियल के कथा, पटकथा आ संवाद साफगोई
से कमल पाण्डेय के लिखल ह।
अमर
शहीदन के लहू से लिखल गाथा ह "बलिया क्रान्ति १९४२"

जदी केहू रउवा से ई पूछे
कि अपना देश के आजादी कब मिलल रहे त रउवा बेहिचक
बता देम १९४७ में....बाकिर, का रउवा ई जानऽतानी
कि अपना देश के एगो जिला अइसनो बा जे अंगरेजन के
राज से १९४२ में आजाद हो गइल रहे? ना खाली आजादिये
मिलल बलुक ७ दिन ले ऊ लोग आपन सरकारो चलावल! उहो
अइसन सरकार जेह में गाँव के सीधा साधा लोग रहे....
जे कब्बो सोचलहूँ ना रहे कि आजादी सभसे पहिले ओही
लोग के भेटाई...
महुआ चइनल पर चल रहल "बलिया
क्रान्ति १९४२" सीरियल में अमर शहीद चित्तू पाण्डेय
आ उनुकरा संघतियन के संघर्ष के दास्तान देखावल जा
रहल बा। ई सीरियल ए.एस.आर. टेलीफिल्म्स के बइनर
में बनल बा आ ऐकर निरमान आसिफ ताह आ निर्देसन शूजा
अली कइले बाड़न।
सम्वेदना
से लथपथ बा "डोली सजा के रखीहऽ"

तीन गो बेटियन से भरल पूरल
परिवार के अइसन कहानी जेकर मतारी बाप अपना बेटियन
पर गुमान करऽता.... बाकिर बड़की बेटी के उठावल एगो
अइसन डेग.... जवन कि एह परिवार के हिला के रख देता....
आ मझलकी बेटी के जिनगी दाँव पर लाग जाता.... एही
तरेह से भावनात्मक आ सम्वेदना से लथपथ परिवार के
कहानी आगे बढ़ऽता....
महुआ चइनल पर आ रहल एह सीरियल
के लेखक आ निर्देसक आकाश दीक्षित बाड़न जे कि देश
के पहिला डेली सोप "शांति" लिखले रहलन। निरमाता
अनीस देव के बनावल एह सीरियल में ॠषभ शुक्ला आ जयश्री
टी जइसन नामी कलाकार लोग मेन रोल में बा।
अझुराईल
रिस्ता नाता के दास्तान ह "मेहन्दी तोहरा नाम के"

आकांक्षा अउर राजीव के आपस
में बहुत पियार बा....दुनू जाना के बाप लइकाईये
के दोस्त आ बिजनेस पार्टनर ह लोग....ई लोग लईकन
के पियार के रिस्ता में बान्हे के फयसला करऽता....बाकिर
समय के फेर अइसन होता कि सुसील आ संस्कारी आकांक्षा
पर बदचलन आ कुलछनी भइला के दोष लाग जाता....ऐकरा
अलावे ऊ एगो हत्या कर जुरुम में जेल हो जाता....दुनू
परिवार के दोस्ती में दरार पड़ि जाता....एही तरीका
के तमाम उतार चढ़ाव के साथे कहानी आगे बढ़ऽता।
विजुअल नेट इंटरटेनमेन्ट
का बइनर में बनल आ महुआ चइनल पर आ रहल एह सीरियल
के निरमाता मेहुल बूच आ निर्देसक सुनील सोचक बाड़न।
सोहागिन
के संकल्प ह "सातो वचनवा निभाईब सजना"

तनूजा एगो खात पीअत परिवार
के लइकी हिअ....परिवार में दुगो बहिन, एगो भाई,
मतारी, बेवा फुआ आ मास्टर बाप बा....बाप के कै बरीस
से तनखाहे नइखे मिलल....तनूजा अपना परिवार के आगे
बढ़ावे के तुगत में बिया....दोसरा तरफ एगो परिवार
ठाकुर सूर्य प्रताप सिंह के बा....उनुकरा परिवार
में मेहरारु के अलावे बा तीन गो बेटा, दू गो पतोह
आ एगो बेटी....धन असबाब सभ बा बाकिर दुनू बड़का लड़ीकन
के विचार बाप से फरके बा....छोटका बेटा हर तरेह
से बाप के साथ देवे के चाहऽता बाकिर एगो हादसा में
ओकर यादास्त भुला जाता....तनूजा एही परिवार में
आवऽतिया आ दुनू परिवार के सम्हारे में लाग जाऽतिया....
महुआ चइनल पर आ रहल एह सीरियल के निरमान अक्स क्रिएशन
का बइनर में भोजपुरी फिलिम उधोग के महानायक कुणाल
सिंह कइले बाड़न आ निर्देसक आरती भट्टाचार्य हई़।
माई
के ममता से सउनाईल "अँचरा के मोती"

हमनी के समाज में हरेक रिस्ता
के एगो नांव दिहल गइल बा....जइसे कि माई....ई खाली
नांवे ना ह....एगो एहसास ह....आउर एह में लुकाईल
बा पियार, बलिदान आ ममता....बाकिर हमनी के समाज
कुछु रिस्ता के बिना सोचले बुझले नांव देले बा....
एही से जब....माई के आगे सउतेला लाग जाला त ऊ बन
जाली मैभा मतारी....अउर एकदम से ओकर माने आ एहसास
बेल्कुले बदल जाला....अउर एह रिस्ता में आ जाला
खीस, जलन....डाह....आ चलाकी....अउर एकाएकी पियार
से सजल सभ रिस्ता हो जाला सउतेला....बाकिर एही रिस्ता
के एगो निमन नांव दिहल चाहऽतारी....आउर मैभा माई
के बीच के दुरी मेटावल चाहऽतारी....एह सीरियल के
मुख्य पात्र माई....
महुआ चइनल पर आ रहल एह सीरियल
के निरमान कर्मभूमि फिल्म्स का बइनर में मीनाक्षी
जैन कइले बाड़ी आ निर्देसक मनीष जैन बाड़न।
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