गोपाल
मैदान में चल रहे राष्ट्रीय व्यंजन व लोक उत्सव के पांचवे और
अंतिम दिन भोजपुरी की लोकप्रिय गायिका कल्पना पटवारी ने अपने
चिरपरिचित अंदाज में कार्यक्रम प्रस्तुत किया। रविवार की रात
करीब आठ बजे से शुरू हुए कार्यक्रम में कल्पना ने शुरुआत अपने
आदर्श भूपेन हजारिका के गंगा तुम बहती हो क्यों.. से किया, तो
अगला गाना घरे छुटी लेके कुछ दिन रहीं ए बलम जी.. सुनाकर शहरवासियों
का मूड ही बदल दिया। इसके बाद उन्होंने ब्रेक लिया, तो राजदीप
चटर्जी ने केसरिया बालम पधारो म्हारे देश जी. व नैनो ने कैसा
जादू किया रे.. सुनाकर शहरवासियों का दिल जीत लिया, तो स्थानीय
गायक मोहन यादव ने पिया डराइबर हो.. सुनाकर तालियां बटोरीं।
ब्रेक के बाद जब कल्पना दोबार मंच पर चढ़ी, तो अलग रंग में थीं।
उन्होंने भिखारी ठाकुर की कृति गबरघिचोर का अइसन लिखलन करम में
विधाता, हित-मीत केहू काम न आवता.. दर्द भरा गीत सुनाकर यह साबित
कर दिया कि वह सिर्फ लटके-झटके वाले गाने नहीं गातीं। इसके बाद
उन्होंने राजदीप चटर्जी के साथ हिंदी फिल्मों के कुछ डांस नंबर
गाए, जिसमें लोक नर्तकियों ने भी भरपूर साथ दिया। कार्यक्रम
का संचालन मनोज भावुक, अनिता सिंह व शत्रुघ्न सिंह ने किया,
जबकि इस मौके पर मुख्य अतिथि डीआईजी, कोल्हान नवीन कुमार सिंह,
विशिष्ट अतिथि टाटा मोटर्स के डीजीएम सुमंत सिन्हा, टाटा स्टील
के अधिकारी गोविंद माधव शरण, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अमरप्रीत
सिंह काले, अखिल विश्र्व भोजपुरी विकास मंच के अध्यक्ष बीएन
तिवारी, झारखंड पुलिस एसोसिएशन के महामंत्री विरेंद्र पासवान,
भारतीय भोजपुरी संघ के अध्यक्ष आनंद बिहारी दुबे समेत कई गणमान्य
उपस्थित थे। आस्था की ओर से अतिथियों को सम्मानित भी किया गया।
साभार : दैनिक जागरण जमशेदपुर
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