सच आ झूठ के फैसला खातिर देश में न्यायालय बनल बा. ई दू कौड़ी के वेबसाईट वाला के कहला से कवनो झूठ सांच ना हो जाई . आज केहू वेबसाईट खोल सकत बा . अपना सुविधा से , अपना-अपना पक्ष में , आपन-आपन सच गढ़ सकत बा. केहू से दुश्मनी निकाल सकत बा . केहू पर भड़ास निकाल सकत बा.
९-१० जनवरी २०१० , दिल्ली में आयोजित विश्व भोजपुरी सम्मेलन में हमरा के कवि के रूप में सादर आमंत्रित कइल गइल त सुधीर कुमार के बेचैनी लेस दिहलस आ एही से ऊ इ सब ड्रामा शुरू कइले बाडन . हम उनकरा के फेर समझावत बानी कि कवनो कवि , साहित्यकार या कलाकार के सृजन करे या मंच पर बोले से उनकर सात पुश्त नइखे रोक सकत .
का बिगाड़ लेलन सुधीर कुमार मनोज तिवारी के ????? का मनोज तिवारी के फिल्म मिलल बंद हो गइल? एंकरिंग बंद हो गइल? स्टेज पर गावल बंद हो गइल ? संस्था मनोज तिवारी के सम्मानित कइल बंद कर देली सन ? अगर मनोज तिवारी अतना घृणित बाडन त फेर सुधीर कुमार उनका पीछे- पीछे काहे घूमत बाडन ? मनोज तिवारी के खिलाफ लोगन में नफ़रत भरलन सुधीर कुमार आ आज खुदे सटल बाडन आ पीछे- पीछे घूमत बाडन . इ दोहरा चरित्र काहे ? का पब्लिक के मूर्ख नइखन बनावत सुधीर ? काहे नइखन मनोज तिवारी से नफ़रत करत सुधीर कुमार ? दरअसल इ सब सुधीर कुमार के फेमस होखे के चाल ह .
मनोज तिवारी भी दिल्ली वाला प्रोग्राम में शिरकत करत बाडन . सुधीर कुमार उनकर विरोध काहे नइखन करत ? मनोज तिवारी के छीछालेदर कइला के बादो सैकड़ो संस्था उनका के सम्मानित कइलस . काहे ना सुधीर ओह संस्थानन के खिलाफ अभियान चलवले ? काहे ना रोक लेले प्रोडूसरन के कि मनोज तिवारी के लेके फिल्म मत बनाव लोग . ....एगो रास्ट्रीय स्तर के संस्था मनोज भावुक के बोलवलस त सुधीर पूरा आसमान कपार पर काहे उठा लेलन ?
सुधीर बाबू ! केहू के सात पुश्त कवनो कलाकार के परफार्म करे से या कवि के लिखे पढ़े या मंच पर बोले से नइखे रोक सकत .
हालांकि दिल्ली वाला कार्यक्रम में हमरा पहुंचे के संभावना कम बा . हमरा माई के तबियत खराब चलत बा. साथही ओही तिथि पर कोलकाता में भी जरुरी कार्यक्रम बा . फिर भी संस्था के लोग सादर आमंत्रित कइले बा आ अगर हम ना पहुंच पायेब त ओह लोग के भावना के क़द्र करत विनम्रता पूर्वक माफी मांग लेब . दरअसल उ लोग मंच पर हमार जलवा देखले बा , हमरा व्यवहार आ लेखनी से प्रभावित बा , साथही कवनो अफवाह के ओह लोग पर असर पड़े वाला नइखे , उ लोग परिपक्व मानसिकता के बौधिक लोग ह, एही से सादर आमंत्रित कइले बा .
सुधीर कुमार के एगो और शिकायत बा कि हमार शुभचिंतक उनका के फोन करत बाडन .सुधीर जी , देश में हमार हजारो शुभचिंतक बाडन . अब के के, का का फोन कइल , हम का जानत बानी ? अब रहल बात कुछ इंटलेक्चुअल लोग के त उ जे तोहरा के समझावल उ सभे भोजपुरी के हस्ती बा, दुनिया देखले बा . हमरो के जानत बा . उ जानत बा कि इ सब जवन तू छपले बाड़ा , तहरा विकृत मानसिकता के उपज ह . एह से बड भइला के नाते उ लोग तहरा के समझावल लेकिन तू त अपना के दुनिया के सबसे होशियार आदमी बुझे ल , एही से इ अफवाह फइला के रखले बाड............त सुधीर बाबू तू इ अफवाह जिनिगी भर लटका के रख , हमरा कुछ फरक पड़े वाला नइखे . उलटे हमरा संतोष होई कि हमरा लोकप्रियता के लाभ एगो वेबसाईट के त मिलल .इहो हमार एगो उपलाब्धिये बा.
बहुत बढ़िया बा जवन जवन संस्था हमरा के सम्मानित करे ओकरा के हूक भर कोस . आज मनोज तिवारी महानायक बाडन . हर गली -कूंचा में उनकर आवाज गूंजत बा .आजकल आइडिया के सेट से फोन कइला पर पहिले उनके आवाज गूंजत बा त काहे नइखन सुधीर कुमार आइडिया कम्पनी के मना कर देत कि मनोज तिवारी के आवाज ना गूंजे के चाहीं .इहाँ सुधीर कुमार के अवकात नइखे . हरदम आदमी के अपना औकात में रहे के चाही.
सुधीर कुमार ना त मनोज तिवारी के अन्दर के कलाकार के मार सकत बाडन , ना ही मनोज भावुक के अन्दर के काव्य प्रतिभा के . .......इ त जेतने विरोध होई ओतने तप के औरी निखरी ,ठीक सोना नियर .
हाथी चले बाजार तS कुत्ता भौंके हजार….