भोजपुरी
भासा अउरी साहित्य के एगो मानल-जानल हस्ताछर अउरी समाज से जुड़ि
के समाज की विकास खातिर सदा परयासरत भोजपुरियन के चहेता, भोजपुरिया
रतन डा. प्रभुनाथ सिंहजी 30 मार्च, 09 के ए नस्वर संसार के तेयागि
के सरग के बासी हो गइनीं।
इहाँ के सगर सिधरले की संघे ही भोजपुरी के
एगो समपूरन अध्याय खतम हो गइल अउरी एतने नाहीं भोजपुरिया समुदाय
भी एगो जुझारु नेता, माटी से जुड़ल माटी के लाल अउरी सच्चा जनसेवक
के खो देहलसि। डा. प्रभुनाथजी के कमी भोजपुरी अउरी भोजपुरिया
समाज में सदा खली अउरी ए अथाह कमी के भरपाई कबो ना हो पाई।
* भोजपुरी हॉल ऑफ़ फ़ेम ( भोजपुरी रतन
) *
डा. प्रभुनाथ सिंहजी के जनम बिहार की सारन
जिला की मुबारकपुर गाँव में सन 1940 में 2 मई के भइल रहे। इहाँ
का बचपने से बहुते कुसाग्र बुधि के रहनीं। सिछा के परति इहाँ
के सुरुवे से बहुते लगाव अउरी धेयान रहे। सायद इहाँ का बचपने
से समाज में बदलाव खातिर सिछा के अहम मानि ले ले रहनीं। इहाँ
के प्रिय बिसय अर्थशास्त्र रहे जवने में इहाँ का एम.ए. अउरी
पी.एच.डी. भी कइनीं।
इहाँ की बिद्वता के पता एही से चलि जाला की
अर्थशास्त्र, प्रबंधन एवं वाणिज्य में इहाँ की तीनिगो किताबन
की परकासन की संघे-संघे बिभिन्न बिसयन पर लगभग 30गो सोध-पतरन
के परकासन भी भइल बा।
भोजपुरी के इ अमर सपुत, भोजपुरी के भी एगो
नयी दिसा तथा ऊँचाई देहलसि अउरी भोजपुरी कविता की संघे-संघे
खिस्सा-कहानी भी लिखि के भोजपुरी के समरीध कइलसि। ए साहित्यकार
के लिखल कुछ खास भोजपुरी रचचन के नाम हS- हीरामोती, ले हमार
गीत (काव्य), बकरी (गाँधीजी की किताब पर आधारित एगो लेख), घर,
पड़ाव (कहानी)।
इहाँ का सिछा की छेत्र में कइगो मानल-जानल पदन के भी गरिमा बढ़वनि।
इहाँ का अर्थशास्त्र विभाग, बिहार विश्वविद्यालय में प्राध्यापक
की साथे-साथे बिभागाध्यछ की रूप में आपन सेवा भी दे चुकल बानीं।
माटी से जुड़ल जनता के इ चहेता नेता दु बेर
बिधायको चुनाइल अउरी 1972 से 77 ले तथा 1980 से 85 ले बिहार
बिधान-सभा के गरिमा में चारि चाँद लगवलसि। बिहार सरकार में इ
जुझारु जननेता बित्तमंत्री की रूप में भी आपन सेवा देहलसि।
भोजपुरी के इ ससक्त हस्ताछर विश्व भोजपुरी सम्मेलन, नई दिल्ली
के कंवेनर अउरी भारतीय साहित्य सम्मेलन के अध्यछता भी कS चुकल
बा। भारत की लगभग अधिकतर भागन के भरमन कइले की साथे-साथे इ अमर
भोजपुरिया मानुस यू.यस.यस.आर., अल्जिरिया, चेक रिपब्लिक, हंग्री,
नेपाल आदि देसन के जतरा भी क चुकल बाने।
समाज से जुड़ि के समाज की विकास खातिर इहाँ
का बहुत सारा काम कइनीं। खासकर सिछा की छेत्र में त इहाँ का
अविस्मरनीय काम कइनीं। राजा सिंह कालेज सिवान, डा. पी.एन. सिंह
डिग्री कालेज छपरा, डा. पी.एन. सिंह इंटर कालेज छपरा, डा. आर.बी.
सिंह हाईस्कूल बिसनपुरा (छपरा), प्रभुनाथ जामदार हाईस्कूल पोखरैरा
(छपरा) जइसन सिछन-संस्थानन के स्थापना तथा संचालन इहें की अगुआई
अउरी देख-रेख में सुरु भइल।
एतना सारा स्कूल-कालेजन की निरमान की पीछे
माननीय प्रभुनाथजी के सबसे बड़हन चाहत रहे सुसिछित समाज के निरमान।
काँहे की सुसिछित समाज में ही सुख-संपन्न, शांतीभरल माहौल के
निरमान हो सकेला। सिछा के बल पर ही गरीबी, बेरोजगारी दूर हो
सकेला।
ननीय डा. प्रभुनाथ सिंहजी के साहित्यिक अउरी
सामाजिक कार्यन खातिर उहाँ के कुछ मानल-जानल पुरस्कारन से सनमानित
भी कइल गइल जवने में 1981 में पटना में आई.आई.बी.एम. की दवारा
सर्वश्रेष्ठ पुस्तक प्रबंधन पुरस्कार अउरी 1996 में अमेरिकन
बायोग्राफिकल इंस्ट्यूट, यू.एस.ए. द्वारा मैन आफ द ईयर (बरिस
के बेयक्ति) पुरस्कार।
इ महान भोजपुरिया रतन अपने जीवन के अंतिम दिनन में भी मानव सुधार
अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, रायपुर के प्रशासक के रूप में
आपन सेवा देत रहने अउरी सिछा तथा समाज की विकास खातिर कृत संकल्पित
रहनें।
भोजपुरी के ए महान विभूति, सिछाविद, समाजसेवक अउरी राजनीतिग्य
के हमार हारदिक नमन अउरी सादर बंदन।
-प्रभाकर पाण्डेय, आई.आई.टी. मुम्बई।
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