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भोजपुरिया रतन, अभिनय सम्राटः रवि किशन
प्रख्यात सिछाविद, आ राजनीतिग्य : भोजपुरी रतन डा. प्रभुनाथ सिंहजी
भोजपुरी रतन पद्मश्री शारदा सिन्हा
संगीत के प्रति समर्पित एगो साधिका आ भोजपुरी रतन विजया भारती

 

 
भोजपुरी रतन : डा० गुरुचरण सिंह


डा० गुरुचरण सिंह हिन्दी आ भोजपुरी के वरिष्ठ रचनाकार हईं . इहाँ के दर्जनों आलेख राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न पत्र-पत्रिकन आ किताबन में प्रकाशित बा. डा० सिंह भोजपुरी साहित्य में प्रबंध काव्य, मुक्तक काव्य , गीत-गजल, निबंध, कहानी, आलोचना इत्यादि विभिन्न विधन के काफी समृद्ध कइले बानी. वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा द्वारा प्रकाशित शोध पत्रिका आ गांधी-दर्शन अउर शाहाबाद के सपूत ;देश के गौरव पुस्तकन में डा० सिंह के कई गो महत्वपूर्ण आलेख काफी प्रशंसित भइल . अभिव्यक्ति, रोहतास वैभव शोध प्रधान पत्रिका के प्रधान सम्पादक ,सूचना आ जन संपर्क विभाग बिहार सरकार द्वारा प्रकाशित रोहतास दर्पण के सम्पादक, भोजपुरी काव्य धारा , कस्बे का मन , गो-सेवा के स्मारिका आदि के सम्पादक के रूप में इहाँ के काफी ख्याति मिलल. इहाँ के अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मलेन के सम्मलेन पत्रिका के समन्वय सम्पादक आ भोजपुरी अकादमी पटना के अकादमी पत्रिका के कार्यकारी सम्पादक बानी.

राष्ट्रीय आ अंतरराष्ट्रीय स्तर के विचार गोष्ठियन में आलेख - पाठ ,संचालन आ अध्यक्षता खातिर कई जगह से सम्मान पत्र आ साहित्य आ सम्पादन के क्षेत्र में सराहनीय योगदान खातिर कला-संस्कृति आ युवा विभाग ,बिहार सरकार , सूचना आ जनसंपर्क विभाग , बिहार सरकार आ अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मलेन , पूर्वांचल एकता मंच , भोजपुरी अकादमी बिहार सरकार, जिला प्रशासन रोहतास के अलावें दर्जनों साहित्यिक संगठनन द्वारा डा० सिंह के सम्मानित कइल गइल . डा० सिंह के हाल आफ द फेम में चयनित भइला पर पूर्वांचल एक्सप्रेस के अपार हर्ष बा. पेश बा इहाँ से भइल सारगर्भित बातचीत के ख़ास अंश .

भोजपुरी रतन

1. पूरा नाम - डा0 गुरुचरण सिंह

2. पोपुलर नाम - डा0 गुरुचरण सिंह

3. जनम स्थान - गाँव-खुढ़नू, पोस्ट-आलमपुर, अंचल- शिवसागर

जिला-रोहतास (बिहार)

4. जन्म - दिन - 18 जनवरी 1958

5. परिचय -
प्राध्यापक, स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग, शांति प्रसाद
जैन कालेज, सासाराम, रोहतास, बिहार, पिन-821115
सह- महामंत्री, अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन
सह- सदस्य, भोजपुरी अकादमी, पटना बिहार

6. जन्म स्थान -
सासाराम, रोहतास

7. भोजपुरी से कब आ कइसे लगाव भइल ?
- भोजपुरी हमार मातृभाषा ह। बचपने से भोजपुरी में रोवलीं, हँसली, पललीं, बढ़लीं। हमरा माई श्रीमती नैनवास देवी, मातृभूमि भारत आ मातृभाषा भोजपुरी से जन्मजात लगाव बा।

8. भोजपुरी भाषा, भोजपुरी मीडिया आ लोक गायकी के वर्तमान हालत पर कुछ कहीं ।
- भोजपुरी भाषी क्षेत्रन के आदिकालीन भाषा के स्वाभाविक रूप से परिवर्तित आ विकसित स्वरूप ह भोजपुरी। ई एगो समृद्ध, व्यावहारिक आ शिष्ट भाषा ह, जवना में गंभीर से गंभीर भावना के सरलता से अभिव्यक्त करे के पूर्ण क्षमता बा।

भोजपुरी में पत्रकारिता के परम्परा के विकास 1948 में आचार्य महेन्द्र शास्त्री द्वारा संपादित ‘भोजपुरी’ पत्रिका से भइल। आजतक लगभग डेढ़ सौ पत्र-पत्रिकन के प्रकाशन भोजपुरी में भइल, बाकिर अधिकांश अर्थाभाव में काल कवलित हो गइला। तबो भोजपुरी सम्मेलन पत्रिका, अकादमी पत्रिका, भोजपुरी माटी, भोजपुरी संसार, माई, द संडे इंडियन, भोजपुरी विश्व इत्यादि पत्र-पत्रिकन के माध्यम से भोजपुरी भाषा आ साहित्य के विकास हो रहल बा। प्रिंट मीडिया के साथे इलेक्ट्रानिक मीडिया के महुआ टी. वी., हमार टी. वी. इत्यादि काफी लोकप्रियता अर्जित कर रहल बा। फिर भी हमरा ई कहे में कवनो संकोच नइखे कि हिन्दी, अंग्रेजी आदि अन्य भाषन के तुलना में भोजपुरी मीडिया अबहिन काफी पिछड़ल बा। जहाँ तक लोकगायकी के बात बा, त परम्परागत लोकगीतन के स्थान पर नया-नया धुनन पर आधारित भोजपुरी लोकगायकी आपन अन्तर्राष्ट्रीय पहचान बना चुकल बा। भोजपुरी लोकगीतन पर आज अश्लीलता के आरोप लगावल जा रहल बा। एकर मूल कारण बाजारवाद बा। एह संबंध में हम कैसेट निर्माता कंपनी के मालिकन, गीतकारन, गायकन आ श्रोता बंधुअन से निहोरा करब कि ऊहां सभे आपन पसंद बदलीं आ भोजपुरी लोकगायकी के परंपरागत शास्त्रीय धुनन आ उदात्त भावना के विस्तार में सहयोग करीं।

9. अपना बचपन के बारे में कुछ बताईं।
- हमार बचपन भोजपुरी संस्कार में बीतल। एगो देहाती मध्यवर्गीय कृषक परिवार में हमार जनम भइल। गाँव के सौहार्दपूर्ण वातावरण में हम बचपन बितवलीं। कबड्डी, चिक्का, गुल्ली-डंडा, दोल्हा पाती इत्यादि खेल हमनी खातिर आज के क्रिकेट, हाकी इत्यादि खेलन से तनिको कम रोचन ना रहे। ओह घरी हमरा गांव में दशहरा के अवसर पर रामलीला होत रहे, ओहमें अभिनय करे के मोका मिलल .गाँव के कुल्ह जातियन में परस्पर प्रेम रहे आ सभे एक दोसरा के सुख दुख में साथ रहत रहे। हम दावा के साथ कहतानी कि हमरा जीवन में जवन गंवई संस्कार मिलल। ऊ आज के महानगरीय सम्यता में हमेशा हमार रक्षा करेला।

10. भोजपुरी बोले आ सीखे के सबसे अच्छा उपाय का बा ?
- भोजपुरी बड़ा सरल, सुगम आ व्यावहारिक भाषा ह। भोजपुरी फिल्म आ सीरिअल देखके आ भोजपुरी भाषा के पत्रिका आ किताब पढ़के भोजपुरी आसानी से सीखल जा सकेला। एह भाषा के व्याकरण अतना सोझ बा कि तनिका धेयान दिहल जाव, त आसानी से भोजपुरी बोलल जा सकेला।

11. सबसे फेवरेट भोजपुरी फिल्म आ गाना ?
- फिल्म ‘गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो’। गाना- कहे के त सब केहू आपन, आपन कहाये वाला के बा।

12. सबसे फेवरिट भोजपुरी शब्द/कहावत:
- शब्द - माई/ कहावत- एक साधे सब सधे, सब साधे सब जाय।

13. सबसे फेवरेट भोजपुरी खाना:
- (लिट्टी, चोखा) अहड़ा पर के सत्तू भरल लिट्टी आ आलू भंटा के चोखा।

14. कवनो अइसन घटना बताईं, जवना के वजह से लाइफ में टर्निंग पाइंट भइल?
- बी. ए. कइला के बाद हम घरे रहके खेती बारी के काम देखे लगलीं। बाबूजी बुढ़ापा के ओर कदम बढ़ा चुकल रहीं आ हमार भाई हमरा से 15-16 बरिस छोट रहन। हमार बड़की माई, जे बाबूजी के पुत्रवत पलले रहे-ऊ हमरा के ढेर दिन खातिर कहीं बाहर ना जाए देल चाहत रहीं। एक दिन हम अपना आध्यात्मिक गुरु स्वामी परमेश्वरानन्द जी के पास बइठल रहीं। उहां के कहलीं कि हमारा एम. ए. कर लेबे के चाही। ओकरा के गुरु आदेश मानके हम एम. ए. कइलीं आ कालेज में प्राध्यापको हो गइलीं। फिर हमरा जीवन के धारा बदल गइल आ हम हिन्दी आ भोजपुरी दूनो भाषा में यथासंभव साहित्य रचना करे लगलीं।

15. भोजपुरिया समाज के सफल होखे खातिर का करे कि चाही ?
- भोजपुरिया लोग सुभाव से ईमानदार, निष्ठावान, मेहनती, कर्मठ आ राष्ट्रभक्त होलन। आज के भौतिकवादी युग में अपना संस्कार के रक्षा करत आपसी एकता बनवले रहे के चाही आ कवनो जायज काम करे में संकोच भा भय ना करे के चाही।

16. भविष्य में भोजपुरी के क्षेत्र में अउरी का प्लान बा ?
- मुक्तक काव्य, प्रबन्ध काव्य, गीत, गजल, कहानी, निबन्ध आदि के साथे भोजपुरी भाषा में आलोचना साहित्य के विकास कइल चाहतानी। भोजपुरी के समीक्षात्मक इतिहास पर काम कर रहल बानी। अबहिन तक भोजपुरी भाषा में भोजपुरी भाषा आ साहित्य के तर्क संगत समीक्षात्मक इतिहास नइखे आ सकल। एकरा अलावे संविधान के आठवी अनुसूची में भोजपुरी के शामिल करावल हमार पहिली प्राथमिकता बा।

17. कुछ लोगन के कहनाम बा कि भोजपुरी ‘‘गँवारू आ पिछड़ल भाषा ह’’, राउर कमेंट का बा ?
- एह तरह के बात कवनो पूर्वाग्रह प्रेरित भा हीन भावना से ग्रस्त आदमिए कह सकेला। भोजपुरी जातीयता, सांप्रदायिकता, क्षेत्रीयता आ दलगत राजनीति से ऊपर उठके राष्ट्रीयता आ मानवता के राग अलापे वाला एगो समृद्ध भाषा ह। जदि राष्ट्रपे्रम आ मानवता के बात कइल गँवारूपन आ पिछड़ापन ह, त हमरा खातिर इहे नीक बा। जदि डाॅ0 राजेन्द्र प्रसाद, बाबू जगजीवन राम, राहुल सांकृत्यायन, आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, डा0 उदय नारायण तिवारी, विद्यानिवास मित्र इत्यादि चिन्तक आ साहित्यकारन के पारिवारिक भाषा के लोग गँवारू आ पिछड़ल मानता, त एह विषय पर चूपे रहल ठीक बा। हँ ओह लोग के सद्बुधी खातिर हम भगवान से याचना जरूर करब।

18. भोजपुरी ‘हाल आफ फेम’ में राउर नाम चुनल गइल बा-कइसन लागता ?
- हम भोजपुरी के एगो साधारण सेवक हईं। रउआ हमरा के एह जोग समझलीं,एकराखातिर बहुत-बहुत धन्यवाद।

19. भोजपुरी के अलावा औरी कवन-कवन भाषा जानेनी,
- हिन्दी, संस्कृत आ अंग्रेजी।

20. भोजपुरी साहित्य आ समाज खातिर राउर योगदान ?
- भोजपुरी में प्रबन्ध काव्य, मुक्तक काव्य, गीत गजल, कहानी, निबन्ध आलोचना इत्यादि विविध विधन में लेखन कार्य आ देष विदेष में रहेवाला भोजपुरी भाइयन के बीच एकता स्थापित करे के प्रयास, आ संविधान के आठवीं अनुसूची में भोजपुरी के सामिल करावे खातिर अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के महामंत्री के रूप में राजनेतन से संपर्क आ जन जागरण के प्रयास।

21. आठवीं अनुसूची में भोजपुरी सामिल ना भइल दोषी के ?
- भोजपुरी भाषी सांसदन में मातृभाषा भोजपुरी के प्रति प्रेम आ तत्परता के अभाव आउर भोजपुरी मतदाता लोगिन द्वारा अपना-अपना सांसदन पर दबाव ना बनावल।

22. टी. वी. चैनल खातिर साहित्य अछूता काहे बा ?
- कबीरदास जी कहले रहीं’’- जे घर जारे आपना, चले हमारे साथ’’। साहित्य समाज आ राष्ट्र खातिर आपन सर्वस्व नेछावर करेवाला भावना के अभिव्यक्ति ह, जबकि टी. वी. चैनल निठाह व्यावसायिक उपक्रम ह। साहित्यकार चाहियो के व्यवसायी ना बन सके आ व्यवसायी के अध्यवसायी बने में घाटा के सौदा लागेला। समाज के संस्कारित करे खातिर चैनल निदेशकन के साहित्यकारन से दिशा निर्देष लेवे के चाही।

23. भोजपुरिया लोग खातिर कुछ संदेश ?
- जाति संप्रदाय क्षेत्रीयता के बात कबो, भूलियो के मन के ना लावे भोजपुरिया
भाईचारा, राष्ट्रधर्म अउरी मानवता के, रक्षा खातिर गरदन कटावे भोजपुरिया
दुनिया में जहाँ रहे ओहिजे के धरती के सोना मेहनत से बनावे भोजपुरिया
सत्य, न्याय, दीन-दुखिअन के सुरक्षा बदे जान आन बान पर लुटाले भोजपुरिया।

एह भोजपुरी संस्कार के रक्षा करत अपना वैदिक काल से लेके अबतक के महान पूर्वजन के प्रति श्रद्धा के भाव राखे के चाही आ आपस में इरिखा भाव छोड़ के सहयोगात्मक रवैया अपनावे के चाही। जय भारत, जय भोजपुरी।

 

पूर्वांचल एक्स्रेस एक मुहीम शुरू कर रहा है की भोजपुरी आठवी अनुसूची में नहीं तो वोट नहीं. सभी भोजपुरिया भाई बहन से निवेंदन है की आप भी इस मुहीम का हिस्सा बने और आपना विचार इस भेजे हमे भेजे, आपके विचार पुर्वंचालेक्स्प्रेस.कॉम पर प्रकाशित किया जायेगा आपके फोटो और नाम के साथ :

हमे ईमेल करे : kuldeep2005@gamil.com, editor@purvanchalexpress.com

 

 



 

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