दिनांक
23-24 अप्रैल को देवभूमि ऋषिकेश में त्रिवेणी घाट के मुक्ताकाश
मंच पर आयोजित विश्व भोजपुरी सम्मेलन का दसवां राष्ट्रीय
अधिवेशन सफलता पूर्वक संपन्न हो गया
उदघाटन-

सम्मेलन
का उदघाटन 23 अप्रैल को वरिष्ठ भा0ज0पा नेता श्री कलराज मिश्र
द्वारा किया गया । इस अवसर पर देश -विदेश से आए तमाम भोजपुरिया
लोगों के साथ-साथ स्थानीय लोग भी भारी संख्या में उपस्थित
थे । श्री कलराज मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि भोजपुरी केवल
भाषा ही नहीं वरन एक संस्कृति है, यह रहन-सहन की एक पद्धति
है । भोजपुरी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने के संबंध
में उन्होने कहा कि इसके लिए प्रयास जारी हैं और आने वाले संसद
सत्र में इस मुद्दे को जोरशोर से उठाया जाएगा।
सम्मान-
इस कार्यक्रम
के दौरान भोजपुरी साहित्यकार एवं कवि श्री हरिराम द्विवेदी
को सेतु सम्मान और प्रख्यात भोजपुरी गायिका श्रीमती मालिनी
अवस्थी को भिखारी ठाकुर सम्मान से सम्मानित किया गया ।
साहित्यिक परिचर्चा - भोजपुरी
समाज का पिछडापन , कारण और निदान - डा० बी .एन . यादव
की अध्यक्षता एवं डा ० लाल बाबू यादव के संचालन में आयोजित परिचर्चा
में भोजपुरी समाज के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए आवश्यक उपायों
पर चर्चा की गई. इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि कृषि के क्षेत्र
में निवेश न होने , उद्योग धंधो की कमी तथा रोज़गार की तलाश में
युवा शक्ति का दूसरे राज्यों में पलायन होना भोजपुरी समाज के
पिछड़ेपन का मुख्य कारण है .परिचर्चा में समाज के लोगों को जागरूक
और संगठित करने के साथ-साथ उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सचेत
रहने की आवश्यकता पर बल दिया गया. चर्चा में आचार्य पंकज, श्रीमती
सरिता बुधू , मारीशस , डा ० बी एन तिवारी, सतीश त्रिपाठी , डा
० अरुणेश नीरन, डा० अशोक सिंह, यमुना व्यथित,मनोज श्रीवास्तव,
डा ० धर्मदेव तिवारी और अरविंद विद्रोही आदि ने विचार व्यक्त
किये .
समकालीन भोजपुरी गद्य : स्थिति एवं गति - इस
सत्र में भोजपुरी साहित्य के प्रचार - प्रसार नही होने पर चिंता
जताई गई . साथ ही भोजपुरी साहित्य के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया
गया. डा० अशोक द्विवेदी के संचालन और डा० रमाशंकर श्रीवास्तव
की अध्यक्षता में आयोजित बतकही में डा ० सरिता बुधू ने कहा की
मारीशस , फिजी , सूरीनाम आदि देशों में भी भोजपुरी की स्थिति
अच्छी नही है. अभी संघर्ष की जरुरत है . भोजपुरी साहित्य के
प्रचार-प्रसार के लिए मनोज भावुक ने भोजपुरी पुस्तक मेला आयोजित
करने व प्रचार-प्रसार के आधुनिक संसाधनों के इस्तेमाल पर जोर
दिया. डा ० प्रेमशीला शुक्ल ने अति भावुक होकर कहा कि भोजपुरी
साहित्य के विकाश हेतु स्वस्थ आलोचना साहित्य को विकसित करना
होगा. डा ० कमलेश राय , डा ० यादव , डा ० त्रिपाठी , डा ० अशोक
सिंह,कुलदीप श्रीवास्तव , जवाहर लाल आदि ने भी भोजपुरी साहित्य
के प्रचार-प्रसार की वकालत की .
कवि-सम्मेलन
- देश के १२ प्रतिनिधि भोजपुरी कवियों ने काव्य -पाठ
किया. अध्यक्षता पंडित हरिराम द्विवेदी और संचालन डा ० अशोक
द्विवेदी ने किया . कड़ी दोपहरी में भी लोगों को न सिर्फ बाँध
कर रखने वरन सोचने -समझने पर मजबूर करने वाले ये कवि थे - चन्द्रभाल
, डा ० कमलेश राय, डा ० अनिल ओझा नीरद , डा ० अनिरुद्ध त्रिपाठी
अशेष , कवयित्री सुभद्रा वीरेन्द्र , युवा कवि मनोज भावुक ,
हास्यावतार पंडित कुबेर नाथ मिश्र 'विचित्र' , तारकेश्वर मिश्र
'राही' , डा ० हजारी लाल गुप्त .
लोकरंग
- पारंपरिक लोक गीतों से लेकर आधुनिक भोजपुरी ग़ज़ल तक
की प्रस्तुति . त्रिवेणी घाट पर लाखों की भीड़ . पाँव रखने तक
की जगह नही. रात के 9 बजे से लेकर भोर के 3 बजे तक चलने वाले
इस अनोखे सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन कवि मनोज भावुक ने
किया . अपनी प्रस्तुति से लोगों को थिरकने पर मजबूर करने वाले
ये गायक थे- कजरी साम्राज्ञी उर्मिला श्रीवास्तव, परमहंस चौरसिया
(निर्गुण ), अजय अजनवी (आधुनिक ), उदय नारायण सिंह (वीर कुंवर
सिंह गाथा , भोजपुरी ग़ज़ल ), रामेश्वर गोप (भिखारी ठाकुर - बारहमासा
) . इस अवसर पर पंडित मुरारी लाल शर्मा की टीम ने मयूर नृत्य
किया .

नटरंग
- विश्व भोजपुरी सम्मेलन के दोनों दिन सांस्कृतिक सत्र
का आयोजन किया गया जो खचाखच भरे त्रिवेणी घाट पर गंगा मैया के
अंचरा के छाँह में देर रात तक चला . इस सत्र में मानवीय महिला
सेवार्पण केंद्र ,आरा बिहार की टीम ने श्रीमती पूनम सिंह के
निर्देशन में भिखारी ठाकुर के बहुचर्चित नाटक गबरघिचोर का मंचन
किया तो सांस्कृतिक संगम सलेमपुर ,देवरिया की लगभग 50 कलाकारों
की टीम ने मानवेन्द्र त्रिपाठी के निर्देशन में भोजपुरी नृत्य
नाटिका ' मेघदूत की पूर्वांचल यात्रा ' का करिश्माई प्रदर्शन
किया. लोग टस से मस होने का नाम नहीं ले रहे थे. कई बार लोग
हंसते -हंसते लोट-पोट हुए तो कई बार छलक पड़े .कार्यक्रम समाप्त
हो गया पर लोग जाना नहीं चाह रहे थे . यह एक अद्भुत प्रस्तुति
थी. नटरंग का संचालन भी विश्व भोजपुरी सम्मलेन दिल्ली के अध्यक्ष
मनोज भावुक ने ही किया .
समापन समारोह -
दिनांक 24
अप्रैल को समापन समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में
आमंत्रित उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री
श्री नारायण दत्त तिवारी ने भोजपुरी भाषा, कला संस्कृति, साहित्य
और संगीत की सराहना करते हुए कहा कि भोजपुरी एक तेजस्वी और
मधुर भाषा होने के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम की भी भाषा है
। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आदोलन के दौरान जेल में बंद
स्वतत्रता सेनानी, जिनमें वे खुद भी शामिल थे, प्राय: एक भोजपुरी
क्रांति गीत गाया करते थे जिसके बोल थे "राजा तोरी राजशहिया
मिटाए देबो न, साहब तोरी साहबजदिया मिटाए देबो न" । उन्होंने
कहा कि यह भोजपुरी भाषा की व्यापकता और प्रभाव का अप्रतिम उदाहरण
है ।

कार्यक्रम के इस सत्र की अध्यक्षता करते हुए भोजपुरी समाज,दिल्ली
के अध्यक्ष श्री अजीत दुबे ने पंद्रहवीं लोकसभा में ध्यानाकर्षण
प्रस्ताव के जरिए भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची
में शामिल किए जाने का मुद्दा उठाने हेतु सर्वश्री जगदंबिका
पाल, रघुवंश प्रसाद सिंह, संजय निरूपम आदि सांसदों को धन्यवाद
करते हुए केन्द्र सरकार से यह मांग की कि नियम 193 के तहत इस
मुद्दे को उठाया जाए एवं इसे पास कराया जाए। साथ ही उन्होंने
यह भी कहा कि 1991 के बाद से भोजपुरी लोक गायकों को पदम पुरस्कार
प्राप्त नहीं हुए हैं । सरकार को इस ओर ध्यान देते हुए प्रसिद्ध
भोजपुरी लोक गायकों यथा मनोज तिवारी, भरत शर्मा व्यास एवं मालिनी
अवस्थी आदि जैसे कलाकारों को पदम पुरस्कारों से नवाजा जाना
चाहिए ।
विश्व भोजपुरी सम्मेलन के राष्ट्रीय महासचिव श्री अरूणेश
नीरन ने विश्व भोजपुरी सम्मेलन द्वारा भोजपुरी के विकास और
उत्थान के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा
कि सम्मेलन का उदे्दश्य भोजपुरी भाषा, साहित्य और संस्कृति
के प्रसार-प्रचार के साथ-साथ इस क्षेत्र की प्रतिभाओं को आदर
और सम्मान देते हुए उन्हें अनुकूल मंच प्रदान करना भी है ।
इसी क्रम में उन्होंने संस्था द्वारा साहित्यिक क्षेत्र की
विशिष्ट हस्तियों को दिए जाने वाले सेतु सम्मान एवं लोक संगीत
के क्षेत्र में दिए जाने वाले भिखारी ठाकुर सम्मान के बारे
में भी विस्तृत जानकारी प्रदान की ।
इस दो दिवसीय
सम्मेलन के दौरान अनेक पुस्तकों के विमोचन आदि के कार्यक्रम
भी आयोजित किए गए। इस सम्पूर्ण आयोजन में विश्व भोजपुरी सम्मेलन
के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सतीश त्रिपाठी सहित सभी प्रांतीय
अध्यक्ष एवं अन्य पदाधिकारी जैसे सरिता बुधु, डा0 बी0एन0 तिवारी,
डॉ अशोक सिंह, श्री अनिल ओझा नीरद, मनोज श्रीवास्तव, मनोज भावुक,
कुलदीप श्रीवास्तव, कमल नारायण मिश्रा एवं श्री बी0एन0यादव
आदि उपस्थित रहे।
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